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साँई टायपिंग इन्‍स्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्‍यू बैंच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मोबाईल नम्‍बर- 9098909565

created Jan 14th, 10:48 by renuka masram


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सच्‍चा दोस्‍त वही होता है जो मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी दोस्‍त का साथ छोड़े। हमें दोस्‍ती करने से पहले इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि हम अच्‍छे दोस्‍त की संगत कर रहे या बुरे दोस्‍त की। क्‍योंकि अच्‍छी दोस्‍ती हमें सही दिशा की और अग्रसर करती है। यदि व्‍यक्ति अच्‍छी दोस्‍ती करता है तो वह सही दिशा की और अग्रसर होता है, परंतु बुरे दोस्‍त की संगत करने से हम बुरी दिशा की और अग्रसर होते है, ऐसा नहीं सोचना चाहिए। क्‍योंकि हम अपनी अच्‍छी सोच से उस बुरे दोस्‍त को भी अच्‍छी राह की और अग्रसर कर सकते है। सच्‍चे दोस्‍त की पहचान यह है कि वह मुश्किल स्थिति में दोस्‍त का साथ दें। सच्‍ची दोस्‍ती में सबसे महत्‍वपूर्ण होता है विश्‍वास। यदि एक दोस्‍त दूसरे दोस्‍त पर विश्‍वास होता है तो वह दोस्‍ती लम्‍बे समय तक चलती है। यदि दोस्‍ती में विश्‍वास ही नहीं तो वह सच्‍ची दोस्‍ती नहीं है और वह दोस्‍ती अधिक समय तक नहीं चलती है। किसी भी व्‍यक्ति के जीवन में सच्‍ची दोस्‍ती का अत्‍यन्‍त महत्‍व होता है। जिस व्‍यक्ति को सच्‍चा दोस्‍त मिल जाता है। उसे दुनिया में किसी और रिश्‍ते की आवश्‍यकता नहीं होती है। और जिसे सच्‍चा दोस्‍त मिल जाता है उससे खुश नसीब व्‍यक्ति और कोई नहीं होता है।  

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