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साई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैंच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Feb 14th, 02:34 by renuka masram


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हमारे भाग्‍य के धागों को कौन देख सकता है। क्षणभर के लिए हितकारी अवसर आता है, हम उसे खो देते हैं और कितने ही महीनों और वर्षों का नाश हो जाता है। संसार में कोई भी ऐसा व्‍यक्ति नहीं जिसके जीवन में एक-दो बार सौभाग्‍यपूर्ण अवसर नहीं आया हो, परन्‍तु जब वह यह देखता है कि व्‍यक्ति उसका स्‍वागत करने को तैयार नहीं, तो वह उल्‍टे पांव लौट जाता है। लिसिपमा अपने समय का एक बहुत प्रसिद्ध चित्रकार और बड़ा कुशल मूर्तिकार भी था। उसने एक कवि की कविता के अनुरूप अत्‍यन्‍त भव्‍य, प्रेरणादायी मूर्ति बनाई और उसमें एक संदेश, एक प्रेरणा, एक आदर्श भर दिया। उस मूर्ति से यूनान के लाखों लोगों ने प्रेरणा ग्रहण की। यह उस समय की बहुचर्चित मूर्ति थी और उसकी इस मूर्ति की चर्चा विदेशों में भी हुई। आज वह मूर्ति विद्यमान नहीं है। समय के गर्भ में विलुप्‍त हो गई है। उसका वर्णन पुस्‍तकों में यदा-कदा आज भी मिल जाता है। इस पत्‍थर की मूर्ति का वहां के लेखक कैलिस्‍ट्राटन ने बड़ा ही रोचक वर्णन किया है- अवसर (अर्थात्) एक नवयुवक है, जिसके जवानी रूपी बाग में विभिन्‍न प्रकार के रंग-बिरंगे फूल खिले हैं। उसका मुखमण्‍डल बड़ा ही मनमोहक है। उसके बाल हवा में लहरा रहे हैं। उसका माथा गरिमा से प्रदीप्‍त है। उसके गालों पर जवानी की लाली छाई हुई है। वह पैरों की उंगलियों के पोरों के बल पर एक पीठिका पर इस प्रकार खड़ा है, मानो ऊंची उड़ान भरने के लिए एकदम तैयार है। उसके घने घुंघराले बाल उसकी भौंहों का स्‍पर्श कर रहे हैं। इन बालों को पकड़ना आसान है। उसके सिर के पीछे के भाग में अभी छोटे-छोटे बाल ही उग रहे हैं। जब वह उड़ जाता है, तो फिर वह किसी के हाथ नहीं आता। यह यूनानी मूर्ति अपने आप में बड़ी अद्वितीय है।  
अवसर के आवागमन और वृत्ति का जितना सुन्‍दर और कलात्‍मक चित्रण इसमें किया गया है, वह आश्‍चर्यजनक होने के साथ-साथ अत्‍यन्‍त शिक्षाप्रद भी है। जिसने अवसर को सामने से पकड़ लिया, समय उसके हाथ गया और वह अपनी मंजिल पा गया। जो चूक गया, उसका पिछला भाग गंजा होने के कारण फिर वह उसे नहीं पकड़ सकता। समय जब हाथ से निकल गया, तब पश्‍चाताप ही शेष रह जाता है और व्‍यक्ति हाथ मलता रह जाता है। अर्थात् समय, अवसर के क्षण को हमेशा पकड़ लेना चाहिए। जब तक आप ऐसा नहीं करेंगे, तब तक आप किसी भी कार्य में सफलता नहीं पा सकते। इसके लिए आपके अन्‍दर विश्‍वास का होना बहुत जरूरी है। संशय दुविधा से ग्रस्‍त मनुष्‍य समय को कभी नहीं पकड़ सकता। समय को सुअवसर कहा गया है। ऐसा मौका हर व्‍यक्ति के जीवन में आता है। अब वह उसको पकड़ नहीं पाता, बहुत दु:ख उठाता है और बाद में इसका उसे बड़ा गहरा पश्‍चाताप होता है। कार्निनल ने यही बात कही है, जो समय अर्थात अवसर का स्‍वागत नहीं करते, तो वह उल्‍टे पांव लौट जाता है।

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