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सॉंई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Friday February 14, 07:54 by lucky shrivatri


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छत्तीसगढ़ में शातिरों ने रेलवे की फर्जी वेबसाइट बनाकर नौकरी देने के नाम पर 22 बेरोजगारों से ठगी कर ली। ठगी करने वालों ने रेलवे की हू-ब-हू वेबसाइट बनाई, फिर ऑनलाइन आवेदन करने वालों को साक्षात्‍कार के लिए बुलाया। आरोपियों ने उम्‍मीदवारों से किस्तों में रूपए ऐंठे और फरार हो गए। हालांकि ये आरोपी बाद में गिरफ्तार कर लिए गए। यह पहला अवसर नहीं है, जब इस तरह की ऑनलाइन ठगी हुई है। देश में रोजाना कहीं कहीं ऑनलाइन ठगी की ऐसी खबरे आती रहती हैं। डिजिटल विस्‍तार के साथ ऑनलाइन ठगी के मामले तेजी से बढ़े हैं। शातिर नए-नए तरीके अपनाकर लोगो को अपने जाल में फांसते है। देश में अभी ऐसा कोई सिस्‍टम विकसित नहीं हो पाया है, जिसमे ऑनलाइन सूचनाओं की सत्‍यता के बारे में आम आदमी आसानी से पता लगा सके। जानकारी और जागरूकता के अभाव में लोग ऑनलाइन ठगी के शिकार हो जाते है। देश में जिस तेजी से डिजिटल विस्‍तार हो रहा है, उसके दुरूपयोग की संभावना भी बढ़ रही है। सोशल साइट्स पर रोजाना हजारों सूचनाओं का प्रवाह हो रहा है। अनेक अवसराे पर सूचना की असलियत का तब पता चलता है, जब उसका हमारे जीवन पर असर दिखता है।  
चिंताजनक पहलू यह है कि पुलिस अभी साइबर क्राइम की रोकथाम के लिए बिल्‍कुल तैयार नहीं है। तो पुलिस के पास दक्ष साइबर एक्‍सपर्ट हैं और ही आधुनिक तकनीक। इसी का नतीजा है कि नब्‍बे फीसदी मामलों मे ऑनलाइन ठगी करने वालों तक पुलिस पहुंच ही नहीं पाती। ऐसे हालात के कारण ही केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों की डिजिटलाइजेशन और ऑनलाइन लेन-देन की योजनाएं लोगों के बीच भरोसा पैदा नहीं कर पा रही है। आम भारतीय को ऑनलाइन लेन-देन करते समय यह डर सताता है कि साइबर ठग उसे किसी भी पल शिकार बना लेंगे और उसका बैंक अकाउंट खाली कर देंगे। इंटरनेट के माध्‍यम से परोसी जाने वाली सामग्री और सूचनाओं को लेकर सरकार कितनी सतर्क है, इसका अंदाजा सुप्रीम कोर्ट के हाल ही के निर्देशों से लगाया जा सकता है। चाइल्‍ड पोर्नोग्राफी और दुष्‍कर्मों के वीडियों का प्रसार रोकने के लिए केन्‍द्र सरकार ने दिसंबर 2018 से सोशल साइट कंपनियों के साथ बैठक तक नहीं की है। इसके बाद कोर्ट को यह निर्देश देना पड़ा कि सरकार बिना देरी किए कंपनियों के साथ बैठक करे। ऐसे हालात में इंटरनेट से आने वाली सामग्री की निगरानी के लिए केवल सरकार के भरोसे बैठना ठीक नहीं होगा। आम आदमी को साइबर एक्‍सपर्ट से लगातार सुझाव और सलाह लेनी चाहिए, ताकि पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक परेशानी से बचाया जा सके। हमारे स्‍मार्टफोन और स्‍मार्ट टीवी की जद और हद को नियंत्रित किया जा सकता है, इसके लिए साधारण तकनीकी उपाय अपनाने होंगे। साइबर क्राइम को रोकने के लिए हमारी सतर्कता और सूझबूझ ही कारगर उपाय है।   

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