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SOURABH SAHU HATTA DAMOH 7987432529 MP HIGH COURT

created Apr 24th, 13:18 by sourabhSahu


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दंड संहिता 1860 (1860 का 45) - धारा 323, 304 और 498 (सपठित दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3/4) - विवाह के पश्‍चात पति सास ननद और बहनोई द्वारा मृतक से दहेज की मांग- तत्‍पश्‍चात दहेज और संतानहीनता के कारण मृतका की प्रताड़ना और उत्‍पीड़न- अभिकथित रूप से अभियुक्‍तों द्वारा मृतका पर तेल छिड़क कर उसे आग लगाया जाना- अस्‍पताल में मृतका के मृत्‍युकालिक कथन को लेखबद्ध किया जाना, उक्‍त कथन के आधार पर विचारण न्‍यायालय द्वारा अपीलार्थी- अभियुक्‍त को सिद्धदोष ठहराया जाना तथा आजीवन कारावास से दंडादिष्‍ट किया जाना- प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 से 3 को दोषमुक्‍त किया जाना - अपीलार्थी - अभियुक्‍त द्वारा उसकी दोषसिद्धि तथा राज्‍य द्वारा प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 से 3 की दोषमुक्ति को चुनौती देते हुए अपीलें फाइल किया जाना- उच्‍च न्‍यायालय ने वर्तमान निर्णय द्वारा दोनों अपीलों का एक साथ निपटारा किया- उच्‍च न्‍यायालय ने मृत्‍युकालिक कथन के आधार पर प्रत्‍यर्थी संख्‍या 1 से 3 की दोषमुक्ति को न्‍यायोचित ठहराया जबकि उच्‍च कथन के आधार पर अपीलार्थी- अभियुक्‍त द्वारा दर्शित प्रायश्चित की भावना को विचार में लेते हुए उसके आजीवन कारावास के दंड को कम करके 14 वर्ष के कारावास में परिवर्तित कर दिया वर्तमान अपील का निपटारा करते हुए संक्षेप में तथ्‍य इस प्रकार है, तारीख 5 मई 2004 को उसकी बहिन, अर्थात श्रीमति पिंकी का विवाह हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार कुंवर पाल, पुत्र रामसिंह निवासी ग्राम सैनी, पुलिस थाना इनचौली से हुआ और उक्‍त विवाह में पर्याप्‍त दहेज दिया गया था किंतु श्रीमति पिंकी के ससुराल पक्ष वाले विवाह में दिये गये दहेज से संतुष्‍ट नहीं थे और उन्‍होंने श्रीमति पिंकी पर यह दबाव बनाना आरंभ किया कि वह अपने पिता से एक रंगीन टीवी, मोटरसाइकिल और 50,000/- रूपये नगद के लिए मांग करें। पिंकी का पति, अर्थात कुंवरपाल और साथ ही श्रीमति लीला, जो ग्राम सैनी के निवासी है तथा उसकी ननद, अर्थात श्रीमति ओमवती और उसका बहनोई अर्थात ह्रदय कुमार, जो वर्तमान में ग्राम सैनी में निवास कर रहे है, दहेज के लिए उसके साथ क्रूरता पूर्वक व्‍यवहार करते थे तथा उस पर हमला भी करते थे। पिंकी ने उक्‍त तथ्‍यों के संबंध में अपने माता-पिता को अवगत कराया था जिसके उपरांत जानकारी देने वाले व्‍यक्ति और उसके कुटुंब के सदस्‍यों ने श्रीमति पिंकी के ससुराल पक्ष के व्‍यक्तियों को संतुष्‍ट करने की चेष्‍ठा कि लेकिन वे फिर भी उसको शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताडि़त करते रहे। तारीख 7 दिसंबर, 2006 को पूर्वांह 10 बजकर 35 पर सभी अभियुक्‍त-व्‍यक्ति ने उसे पर कैरोसीन तेल डालकर उसे आग लगा दी और इस संबंध में ग्राम सैनी के ग्रामीण व्‍यक्ति ने फोन द्वारा पिंकी के पिता को सूचना दी थी। तदुपरान्‍त श्रीमति पिंकी के पिता और कुटुंब के सदस्‍य ग्राम सैनी स्थित श्रीमति पिंकी के ससुराल वाले घर पहुंचे तथा उसे चिकित्‍सीय उपचार हेतु जिला अस्‍पताल प्‍यारे लाल शर्मा, मेरठ में दाखिल कराया। उक्‍त अस्‍पताल के डॉक्‍टर ने उसकी बुरी तरह जली अवस्‍था को देखकर उसे आयुर्विज्ञान महाविद्यालय मेरठ को निर्दिष्‍ट किया और उपचार के दौरान तारीख 8 दिसंबर, 2006 को प्रात: लगभग 4:45 बजे श्रीमति पिंकी का जल जाने के कारण हुई क्षतियों से देहांत हो गया। कुंवरपाल ने अपनी पहली पत्‍नी श्रीमति अंजु, पुत्री गजराज सिंह, निवासी बुलंदशहर की भी हत्‍या की थी और इस संबंध में उसके विरूद्ध दंड संहिता की धारा 304(ख) के अधीन पुलिस थाना इनचौली में प्रथम इत्तिला रिपोर्ट भी दर्ज की गयी थी।  

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