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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤ S.N.0180-MP High Court (District court) Format Matter ✤|•༻

created Friday September 23, 04:45 by typing guru


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एक मामले में उच्‍च न्‍यायालय ने भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के उद्देश्‍यों पर प्रकाश डालते हुए यह अभिनिर्धारित किया है कि इस अधिनियम के प्रावधानों से यह इंगित होता है कि विधायिका का आशय भ्रष्‍ट लोक सेवकों के कृत्‍यों को गंभीरता से लेते हुए उन्‍हें दण्डित करना है तथा उन्‍हें भ्रष्‍ट कार्यों के लिए किसी भी तरह से माफ करना नहीं है। प्रत्‍येक त्रुटि चाहे वह कितनी ही भारी क्‍यों दिखती हो फिर भी उसे अनुचित हेतु से नहीं जोड़ना चाहिए। यह संभव है कि कोई विशिष्‍ट न्‍यायिक अधिकारी निरंतर ऐसे आदेश पारित करे जो न्‍यायिक आचरण में संदेह उत्‍पन्‍न करते हों, जो पूर्ण रूप से अथवा आंशिक रूप से निर्दोष कार्य कारण नहीं किए जा जा सकते हो। ऐसे मामले में भी उच्‍चतर न्‍यायालय के लिए अपनाया जाने वाला समुचित मार्ग उसके कार्य के गोपनीय अभिलेख में उसका उपयोग करना है।
    उच्‍चतर न्‍यायालय में न्‍यायाधीशों का कर्तव्‍य न्‍यायिक अनुशासन को सुनिश्चित करना और समस्‍त संबंधित व्‍यक्तियों से न्‍यायालय के लिए सम्‍मान सुनिश्चित करना है। न्‍यायपालिका के लिए सम्‍मान उस समय बढ़ता नहीं है जब निचले स्‍तर के न्‍यायाधीशों की उम्र रूप में आलोचना की जाती है और सार्वजनिक रूप से उन्‍हें डॉट-फटकार लगायी जाती है।
    क्रिमिनल लॉ संशोधन अधिनियम, 1952 के प्रावधानों से स्‍पष्‍ट हो जाता है कि विधानमण्‍डल का उसमें अधिनियमित करने का आशय, भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा में 161, 165 या भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम 1947 की धारा 5(2) के अधीन दण्‍डनीय अपराधों के विचारण के लिए और तीव्रगति से उनका निस्‍तारण करने के लिए भारतीय दण्‍ड संहिता तथा दण्‍ड प्रक्रिया संहिता 1898 को संशोधित करना था।
    विचारण सुपुर्दगी की कार्यवाही को भी समाप्‍त कर दिया जाता है और विशेष न्‍यायाधीशों को विचारण करने के लिए उन्‍हें सुपुर्द किये बिना ही इन सभी अपराधों का संज्ञान लेने की भी शक्ति प्रदान कर दी गयी तथा मजिस्‍ट्रेट द्वारा वारण्‍ट मामलों के विचारण के लिए दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1898 द्वारा विहित प्रक्रिया द्वारा अभियुक्‍त व्‍यक्तियों को विचारणार्थ शक्ति प्रदान करना था। विशेष न्‍यायाधीशों की न्‍यायालयों को बिना ही एक जूरी या निर्धारकों की सहायता के ही मामले का विचारण करने वाले सत्र न्‍यायालय समझे जाते हैं। बुद्ध अकादमी टीकमगढ़  

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