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रेडियोसक्रियता आलोक पाण्डेय द्वारा

created Aug 21st 2016, 04:14 by krishnawatar Pandey


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यह किसी पदार्थ का वह गुण है जिसके कारण उसके नाभिक से अल्फा बीटा तथा गामा किरणें निकलती है
इसकी खोज फ्रासं के वैज्ञानिक हेनरी बेक्वेरल ने 1896 में किया  
यदि यह क्रिया स्वतः होती है, को इसे प्राकृतिक रेडियों सक्रियता, जबकि मनुष्य के द्वारा कराये जाने पर कृत्रिम रेडियो सक्रिता कहते है।
प्राकृतिक रेडियोसक्रियता मुख्यतः भारी नाभिकों से होती है। यूरेनियम पहला खोजा  गया प्राकृतिक रेडियोसक्रिय तत्व है।
कृत्रिम रेडियोसक्रियता की खोज आइरीन क्यूरी तथा उनके पति एफ. जोलिओ(क्यूरी) ने 1934 मे किया।
प्रथम कृत्रिम रेडियोसक्रिय तत्व फॉस्फोरस (15p10) है जिसे एल्यूमिनियम(13A27) पर अल्फा कणों के प्ररहार द्वारा प्राप्त किया गया था।
रेडियोसक्रियता का मात्रक रदरफोर्ड, क्यूरी तथा बैकेरल होता है।
बैकेरल रेडियोसक्रियता का एस आई मात्रक होता है। रेडियोसक्रियता पदार्थ की वह मात्रा है जो 1 विघटन प्रति सेकेण्ड की दर से विघटित होती है एक बैकेरल कहलाता है।
रेडियोसक्रिय किरणों की माप गिगर मूलर काउन्टर (जी.एम. काउन्टर) के द्वारा किया जाता है।
वर्ग विस्थापन का नियम
इस नियम की खोज सोडी, फजान एवं रसेल ने 1913 में किया। इस नियम के अनुसार
जब किसी रेडियोसक्रिय तत्व के एक अल्फा कण का उत्सर्जन होता है तो उसके परमाणु क्रमांक में दो की कमी तथा परमाणु भार में चार की कमी आती है।
रेडियोसक्रिय तत्व के बीटा कण के खोने पर परमाणु क्रमांक में एक वृद्धि होती है, जबकि परमाणु भार पर कोई प्रभाव नही पड़ता है।
रेडियोसक्रिय तत्व के गामा कण खोने पर परमाणु क्रमाक एवं परमाणु भार में कोई परिवर्तन नहीं होता है।

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