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created Nov 15th, 07:16 by Kuldeep Singh 1212


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बेल्जिमय में सालों से बन रहा है विशालकाय ऑमलेट
अगर ऑमलेट आपका पंसदीदा फूड है, तो एक बार आपको बेल्जियम जरूर जाना चाहिए। यहां होने वाले सालाना ऑमलेट मेकिंग फेस्टिवल में शरीफ होने के लिए, जहां हर साल हस हजार अंड़ों का ऑमलेट बनाया जाता है। बिते मंगलवार को दुनिया भर के अंडा प्रेमी बेल्जियम में इकठ्ठे हुए और मिलकर एक विशालकाय ऑमलेट तैयार किया।
22 सालों से हो रहा है समारोह
दरअसल, अंडे के शौकीन लोग हर साल बेल्जियम में इकठ्ठे होते हैं, और यहां के सालाना ऑमलेट ट्रेडिशन में हिस्सा लेते हैं। यह परंपरा यहां पिछले 22 सालों से चली रही है। यहां एकत्र लोग दस हजार अंड़ों से तैयार इस ऑमलेट का लुत्फ उठाते हैं। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक हर उम्र के एगिटेरियन फूड के शौकीन लोग यहां आते हैं। इस साल भी इस परंपरा को शिद्दत से निभाया गया। बेल्जियम में यह आयोजन हुआ। लोगों ने सामूहित तौर पर इकठ्ठे होकर ऑमलेट बनाई और उसको मिलकर खाया।
चार मीटर चौडें पैन में बनी ऑमलेट
हजारों अंडों की ऑमलेट बनाने कि लिए चार मीटर चौड़े एक पैन का इस्तेमान किया गया। इसके लिए बाकायदा यूरोपियन सुपर मार्केट से मुर्गी के अंडे मंगाए गए थे। आयोजकों को इस बाद का पूरा यकीन है कि यह अंडे पूरी तरह सुरिक्षत हैं। विशालकाय ऑमलेट बनाने का  यह ट्रेडिशन फ्रांस, कनाडा और अमेरिका तक फैला है। इस समारोह के लिए वर्ल्ड फ्रटर्निटी ऑफ नाइट ऑफ जाइंट ऑमलेट के सदस्य बेल्जियम में इकठ्ठे हुए। हमेशा की तरह इस बार भी इनका सिर्फ एक ही मकसद थी, विशालकाय ऑमलेट बनाना। फ्रटर्निटी ऑफ नाइट ऑफ जाइंट ऑमलेट ऑर्गनाइजेशन 1973 से काम कर रही है।
उत्सुक रहते हैं लोग
ऑमलेट बनाने के लिए इकठ्ठे हुए लोग ही इस ऑमलेट को तैयार करने में पूरी तैयारी करते हैं। दस हजार अंड़ों को बड़े-बड़े बर्तनों में फोड़कर फेंटने से लेकर कहाड़ी में डालने और पकाने तक का काम सभी उत्साह के साथ करते हैं। खास बात यह है। कि ऑमलेट को खुली आंच पर पकाया जाता है। वर्ल्ड फ्रेटर्निटी ऑफ नाइट्स ऑफ जिआंट ऑमलेट के ग्रांड मास्टर रॉबर्ट एन्सेन के अनुसार , हम देखते हैं कि यह परंपरा कहां तक जाती है, क्योंकि इस लेकर बीच-बीच में बंद होने की अपवाह भी आती रहती हैं। लोग कह रहे हैं कि वह डरे हुए हैं। लेकिन, फिलहाल तो इस बड़े इवेंट को काफी एंजॉय किया जा रहा है। से भी जानते हैं रंग परिवर्तित करने वाली यह नदी कोलंबिया के प्राकृतिक चमत्कारी में से एक है।
    इसलिए बदलता है नदी का रंग
नदी का पानी रंग क्यों बदलता है, यह सवाल सभी के मन में आता है? तो बता दें कि नदी का पानी दरअसल, रंग नहीं बदलता यह पानी नदी में मौजूद एक खास पौधे मैकेरेकिया क्लेविगरा के कारण रंग बदलात है। जिसके चलते लगता है जैसे पूरी नदी प्राकृतिक रूप से रंगीन है। यह पौधा नदी की तलहटी में मौजूद रहता है। नदी का यह रंग-बिरंगा रूप लाइट और पानी की कंडीशन पर निर्भर करता है पौधा हरा, नारंगी, लाल, पीला और नीले, रंग में दिखाई देता है। दरअसल, यह पौधा समय-समय पर जि तरह के रंग बदलता है, वैसा ही रंग नदीं के पानी का भी नजर आने लगता है। पौधे के गुलाबी , बैंगनी, पीले, हरे, लाल, सभी रंगों का प्रभाव नदी के पानी में दिखाई देता है। दरसल पौधे के  रंग और लाइट का मिश्रण ही इस नदीं में रगों की झलक का कमाल है। नदी में खूबसूरत घुमावकर रॉक पूल है। यह घुमावदार चट्टाने इस नदी की खूबसूरती में चार चांद लगा देती हैं।
 

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