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TEST-8 FOR MPHC AG-3 BY ACADEMY FOR STENOGRAPHY, MORENA,DIR- BHADORIYA SIR

created Dec 6th, 14:03 by Thakur Anil Singh Bhadoriya


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केंद्रीय विद्यालयों में सुबह होने वाली प्रार्थना को लेकर सर्वोच्‍च न्‍यायालय में एक जनहित याचिका दाखिल हुई है। याचिकाकर्ता ने प्रार्थना को एक खास धर्म को प्रोत्‍साहित करने वाला और अन्‍य के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है। ऐसी प्रार्थना केवल केन्‍द्रीय विद्यालयों में ही नहीं, देश के हर विद्यालय में होती हैं। सबका सार यही है कि हम अच्‍छे इंसान बनें। दुर्गुणों से दूर रहकर अपने कर्तव्‍यों का निष्‍ठा से पालन करें। इसमें कहीं देशद्रोह इंसानियत से विद्रोह नहीं है। ऐसी प्रार्थनाएं आजादी से पहले भी होती थीं। इन 70 वर्षों में कभी किसी ने, चाहे वह हिन्‍दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कोई भी हो, प्रार्थना, उसकी भाषा, उसके शब्‍दों पर आपत्ति नहीं की। जब 70 सालों में ऐसी कोई आपत्ति नहीं आई तो अचानक ऐसा क्‍या जनता का अहित हुआ कि मामला सर्वोच्‍च न्‍यायालय पहुंच गया। ऐसा ही मुद्दा सिनेमाघरों में राष्‍ट्रगान का है। आजादी के बाद से ही स्‍कूलों की प्रार्थना की तरह वहां भी बिना धार्मिक भेदभाव के फिल्‍म देखने वाला व्‍यक्ति खड़ा होकर राष्‍ट्रगान गाता था। अचानक क्‍या हुआ कि कुछ साल पहले यह मामला भी हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। पहले और आज के समय में कोई फर्क नहीं है। वही हिन्‍दू और वही मुस्लिम हैं। अन्‍तर राजनीतिक दलों और वोटों की भूख वाली उनकी मानसिकता का है। पहले उन्‍हें समाज की एकता, देश की अखण्‍डता की चिंता होती थी। वोट भी मिलें या कम मिलें तो वे परवाह नहीं करते थे। आज वह मानसिकता गायब होती जा रही है। राजनेताओं को वोटों से मतलब है। फिर चाहे समाज टूटे या हिंसा में लोग मरें। ऐसी सोच राष्‍ट्रहित में नहीं है। दल और नेता नहीं समझें तो हमारी अदालतों को उन्‍हें और ऐसे मुद्दे बनाने वालों को समझ देना चाहिए कि आज देश की जरूरत शिक्षा, उद्योग, रोजगार, विकास और स्‍वास्‍थ्‍य हैं। यदि यह नहीं दे सकते तो मत करो लेकिन समाज को एक और देश को अखण्‍ड तो रहने दो। देश कमजोर हुआ तो राजनीतिक दलों को कोई टके के भाव नहीं पूछेगा। रॉकेट मैन के उपनाम से मशहूर कैलाशवडीवू सिवन (के.सिवन) तमिलनाडु के पहले ऐसे वैज्ञानिक हैं जो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन का पद संभालेंगे। सिवन को रॉकेट मैन यूं ही नहीं कहा जाता। वर्ष 1982 में पहली बार जब वे इसरो से जुड़े तो पीएसएलवी रॉकेट परियोजना रॉकेट के विकास में सबसे बड़ी बाधा जटिल क्रायोजेनिक इंजन का विकास था। इरादों के पक्‍के और लक्ष्‍य के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहने वाले सिवन के नेतृत्‍व में भारत ने यह तकनीकी हासिल कर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास करा दिया। असफलताओं के बावजूद अपनी प्रतिबद्धता के दम सफलता हासिल करने का जुनून जीएसएलवी के विकास में देखा जा सकता है। भारी संचार उपग्रहों की लांचिंग और अंतरिक्ष कार्यक्रमों में आत्‍मनिर्भरता के लिए जीएसएलवी का विकास सिर्फ आवश्‍यक था बल्कि इसरो के लिए संजीवनी जैसा था। वर्ष 1982 में इसरो में नियुक्ति के बाद पीएसएलवी परियोजना से जुड़े। युवती को शादी का झांसा देकर पीताम्‍बरा कालोनी दतिया निवासी डॉक्‍टर अमित समाधिया ने उससे साथ दुष्‍कर्म किया। पीडिता ने बताया वर्ष 2012 में उपचार के लिए जेएएच गर्इ थी तब डॉक्‍टर अमित से मुलाकात हुई। उन्‍होंने मोबाइल नंबर मांग लिया। दोनों में बातचीत होने लगी। नवबंर 2012 में अमित गांधीनगर में पीताम्‍बरा अपार्टमेंट फ्लैट में लेकर गया।  

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