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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || CPCT Admission Open

created Mar 14th, 10:05 by Deendayal Vishwakarma


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महिला और पुरुष का भेद पुरातन है। पहले जीवन एक सेल के गैमेट होते थे। ये एकलिंगीय और केवल एक कोशिका से बने होते थे। इनमें नर और मादा नहीं होते थे। फिर भी दो गैमेट के संयोग से नए गैमटों का सृजन होता था। बड़े गैमेट अपनी जगह स्थिर रहने लगे, जबकि छोटे गैमेट तेजी से इधर-उधर चलकर उनके साथ जुटने लगे। ये गैमेट समयक्रम में मादा बने और छोटे गैमेट नर बने। आज भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं की शारीरिक दृढ़ता ज्‍यादा होती है। शायद यही कारण है कि अमेरिका में महिलाओं की औसत आयु 80 वर्ष है,  जबकि पुरुषों की औसत आयु मात्र 70 वर्ष है।
    महिलाएं छोटे बच्‍चों को इसलिए आसानी से पाल पाती हैं, क्‍योंकि वे उनसे अचेतन वार्तालाप कर सकती हैं और बातें करते रहना उनके लिए आसान होता है। गणित आदि तार्किक विचारों और संकल्‍प की पूर्ति में पुरुष ज्‍यादा निपुण होते हैं। जैसे-जैसे जीवों का विकास होता गया वैसे-वैसे नर और मादा के अंतर बढ़ते गए और आज यह अंतर मनोवैज्ञानिक भी हो गया है। हम यह मान सकते हैं कि जिस प्रकार बीते अरबों वर्षों में यह अंतर बढ़ता गया है, आगे भी यह बढ़ता ही जाएगा। 21वीं सदी के परिवार की संरचना को समझने का दूसरा आधार नई तकनीकें हैं। बिजली से जलने वाले बल्‍ब एवं बिजली से ही चलने वाली मिसी और वाशिंग मशीन, पाइप से आने वाला पानी, गैस से चलने वाले स्‍टोव आदि उपकरणों से घरेलू कार्य सरल हो गए हैं। पहले परिवार चलाने के लिए एक व्‍यक्ति को पूरा समय इन कार्यों को करने के लिए देना पड़ता था। अब ये कार्य घंटे दो घंटे में संपन्‍न हो जाते हैं। इसलिए महिला के लिए अब पर्याप्‍त समय दूसरे कार्यों के लिए उपलब्‍ध हो गया है। 21वीं सदीके परिवार की संरचना हमें इन दोनों कारकों के बीच खोजनी है। एक यह कि महिला और पुरुष के बीच अंतर बढ़ता जाएगा और दूसरा यह कि गृह कार्य के लिए एक व्‍यक्ति को अपना पूर्ण समय देना अब जरूरी नहीं रह गया है। इसी परिप्रेक्ष्‍य में हम आज के प्रचलित परिवार के नए ढांचे के सुझावों का आकलन कर सकते हैं। एक सुझाव है कि महिला और पुरुष गृह कार्य में बराबर का योगदान करें जैसे भोजन पकाने अथवा कपड़ा धोने के लिए। यह महिला और पुरुष अथवा नए और मादा के बीच बढ़ते अंतर के ऊपर बताए सिद्धांत के विरुद्ध बैठता है। अरबों वर्षों की जीवों की यात्रा बताती है की नर और मादा का अंतर बढ़ता गया है। एक कोशिका वाले गैमेट में केवल आकार या वजन का अंतर था। पौधों में केवल फूल के आकार में अंतर होता है। मनुष्‍य में मनोवैज्ञानिक अंतर भी हो गया है। आने वाले समय में यह अंतर बढ़ेगा।  

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