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साँई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मो.नं. 9098909565

created Wednesday August 14, 04:33 by lucky shrivatri


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भाई-बहन के पवित्र रिश्‍ते को मजबूत प्रेम पूर्ण आधार देता है रक्षाबंधन का त्‍योहार। श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाए जाने वाले इस पर्व का ऐतिहासिक, सामाजिक, धार्मिक और राष्‍ट्रीय महत्‍व भी है। इस दिन बहन भाई की कलाई पर रेशम का धागा बांधती है तथा उसके दीर्घायु जीवन एवं सुरक्षा की कामना करती है। बहन के इस स्‍नेह से बंधकर भाई उसकी रक्षा के  लिए कृत संकल्‍प होता है। हालांकि रक्षाबंधन की व्‍यापकता इससे भी ज्‍यादा है। राखी देश की रक्षा पर्यारवण की रक्षा, धर्म की रक्षा, हितों की रक्षा आदि के लिए भी बांधी जाने लगी है।  
विश्‍व कवि रवीन्‍द्रनाथ टैगोर ने इस पर्व पर बंग भंग के विरोध में जनजागरण किया था और इस पर्व को एकता और भाईचारे का प्रतीक बनाया था। रक्षा सूत्र सम्‍मान और आस्‍था प्रकट करने के लिए भी बांधा जाता है। रक्षाबंधन का महत्‍व आज के युग में इसलिए भी बढ़ जाता है, क्‍योंकि आज मूल्‍यों के क्षरण के कारण सामाजिकता सिमटती जा रही है और प्रेम सम्‍मान की भावना में भी कमी रही है। यह पर्व आत्‍मीय बंधन को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ हमारे भीतर सामाजिकता का विकास करता है। इतना ही नही यह त्‍योहार परिवार, समाज, देश और विश्‍व के प्रति अपने कर्तव्‍यों के प्रति हमारी जागरूकता भी बढ़ाता है।  
वैसे तो इतिहास में राखी के महत्‍व के अनेक उल्‍लेख मिलते है। मेवाड़ की महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायुं को राखी भेजकर रक्षा-याचना की थी। हुमायुं ने भी राखी की लाज रखी। कहते है, सिकंदर की पत्‍नी ने पति के हिंदू शत्रु पुरू को राखी बाध कर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के समय सिकंदर को मारने का  वचन लिया था। पुरू ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए वचन का सम्‍मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था।  

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