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बंसोड टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा, छिन्‍दवाड़ा मो.न.8982805777 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रांरभ संचालक-सचिन बंसोड

created Nov 8th, 14:01 by bansod typing


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पिछले दिनों दिवाली उत्‍सव ने सभी को सक्रिय रखा। बाजारों में भीड़ उमड़ी लक्ष्‍मी पूजी गई और अब दिन गया देव प्रबोधनी एकादशी का। हिंदू संस्‍कृति के अनुसार आज परमात्‍मा जागता है। तो चलिए हम भी जाग जाएं। हम एक ऐसी नींद में रहते हैं जो जागते हुए भी नींद है। पिछले दिनों धन को लेकर इतनी दौड़ चली तो क्‍या गरीबी मिट गई? आज देव प्रबोधनी एकादशी पर अपने भीतर इतनी जागृति लाएं कि हम समझें कि गरीबी का एक रूप निकम्‍मापन भी है। मनुष्‍य कितने कारणों से गरीब है? या तो योग्‍य नहीं है या उसे अवसर नहीं मिले। कुछ लोग दुर्भाग्‍य के कारण तो कुछ अभाव और जरूरत का अंतर नहीं समझते इसलिए गरीब हैं। कुछ के जीवन में आवश्‍यकता की अपेक्षा मांग अधिक है, इसलिए गरीब हैं। इन सबसे ऊपर वह गरीब है जो निकम्‍मा है। देश में निकम्‍मों की फौज है। सरकारों ने सुविधाएं तो ऐसी-ऐसी दे दीं कि लोगों की जरूरत पूरी हुई या हुई हो, वो निकम्‍मे जरूर हो गए। कृषि वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं- फसल जल्‍दी उगाना हो, कीटाणुओं से मुक्‍त रखना हो, कीटाणुओं से मुक्‍त रखना हो तो ध्‍वनि विकिरण का उपयोग किया जाता है। निकम्‍पापन मिटाने के लिए हमें ऐसी ही तकनीक अपनाना चाहिए कि जब कोई निकम्‍मा जीवन में आए, उसे परिरम की की प्रेरणा, कुछ प्राप्‍त होने का लोभ और अपने मनुष्‍य होने के प्रति जागृति का रेडिएशन उसमें जरूर करें, अन्‍यथा देश को भविष्‍य में जो-जो बातें नुकसान पहुंचाने वाली हैं, उनमें से एक होगा निकम्‍मापन।  

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