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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤CPCT_Admission_Open✤|•༻

created Jan 14th, 09:27 by Deendayal Vishwakarma


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भारतीय इतिहास कई महान व्‍यक्तियों के बदौलत संपूर्ण विश्‍व में जाना जाता है। भारतीय धरा पर कई विद्वान और पंडित हुई हैं जिन्‍होंने इस धरती को ऐसी देन दी है जिस से हर भारतीय का सीन गर्व से चौड़ा हो जाता है। इन्‍हीं महान आत्‍माओं में से एक हैं कालिदास। इनके जीवनकाल से सकारात्‍मक होकर जीने की प्रेरणा मिलती है।
    कालीदास का जन्‍म किस काल में हुआ और वे मूलत: किस स्‍थान के थे इसके बारे में अलग-अलग विद्वानों में काफी विवाद है। कालिदास संस्‍कृत भाषा के महान कवि और नाटककार थे। भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन को आधार बनाकर उन्‍होंने काफी रचनाएं की और उनकी रचनाओं में भारतीय जीवन और दर्शन के विविध रूप और मूल तत्‍व निरूपित हैं। वे अपनी इन्हीं विशेषताओं के कारण राष्‍ट्र की समग्र राष्‍ट्रीय चेतना को स्‍वर देने वाले कवि माने जाते हैं और कुछ विद्वान उन्‍हें राष्‍ट्रीय कवि का स्‍थान तक देते हैं।
    कालिदास के बारे में कथाओं और किम्‍वादंतियों से ये पता चलता है कि वह शक्‍लो-सूरत से सुंदर थे और विक्रमादित्‍य के दरबार के नवरत्‍नों में एक थे। कहा जाता है कि प्रारंभिक जीवन में कालिदास अनपढ़ और मूर्ख थे। उनकी शादी विद्योत्‍तमा नाम की राजकुमारी से हुई। ऐसा कहा जाता है कि विद्योत्‍तमा ने प्रतिज्ञा की थी कि जो कोई उसे शास्‍त्रार्थ में हरा देगा, वह उसी के साथ शादी करेगी। जब विद्योत्‍तमा ने शास्‍त्रार्थ में सभी विद्वानों को हरा दिया तो अपमान से दुखी कुछ विद्वानों ने कालिदास से उसका शास्‍त्रार्थ कराया। विद्योत्‍तमा मौन शब्‍दावली में गूढ़ प्रश्‍न पूछती थी, जिसे कालिदास अपनी बुद्धि से मौन संकेतों से ही जवाब दे देते थे। विद्योत्‍तमा को लगता था कि वो गूढ़ प्रश्‍न का गूढ़ जवाब दे रहे हैं। उदाहरण के लिए विद्योत्‍तमा ने प्रश्‍न के रूप में खुला हाथ दिखाया तो कालिदास को लगा कि यह थप्‍पड़ मारने की धमकी दे रही है। उसके जवाब में उसने घूंसा दिखया तो विद्योत्‍तमा को लगा कि वह कह रहा है कि पांचों इंद्रियां भले ही अलग हो, सभी एक मन के द्वारा संचालित हैं। कालिदास और विद्योत्‍तमा का विवाह हो गया तब विद्योत्‍तमा को सच्‍चाई का पता चला कि वे अनपढ़ हैं। उसने कालिदास को धिक्‍कारा और यह कह कर घर से निकाल दिया कि सच्‍चे पंडित बने बिना घर वापिस नहीं आना। कालिदास ने सच्‍चे मन से काली देवी की आराधना की और उनके आशीर्वाद से वे ज्ञानी और धनवान बन गए। उन्‍होंने विद्योत्‍तमा को अपना पथप्रदर्शक गुरू माना और उसके इस वाक्‍य को उन्‍होंने अपने काव्‍यों में जगह दी।

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