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साई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैंच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Feb 8th, 04:13 by rajni shrivatri


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एक जौहरी के निधन के बाद उसका परिवार संकट में पड़ गया। खाने के भी लाले पड़ गए। एक दिन उसकी पत्‍नी ने अपने बेटे को नीलम का एक हार देकर कहा- बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ और कहना कि इसे बेचकर वे कुछ रूपए दे दें।  
बेटा वह हार लेकर चाचाजी के पास गया। चाचा ने हार को अच्‍छी तरह से देख-परखकर कहा- बेटा मा से कहना कि अभी बाजार बहुत मंदा है। थोड़ा रूककर बेचना, अच्‍छे दाम मिलेंगे। और उसे थोड़े से रूपए देकर कहा कि तुम कल से दुकान पर आकर बैठना। अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान पर जाने लगा और वहां हीरे-रत्‍नों की परख का काम सीखने लगा। एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया और लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने आने लगे।  
एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी मां से वह हार लेकर आना और कहना कि अब बाजार बहुत तेज है, उसके अच्‍छे दाम मिल जाएंगे। मां से हार लेकर उसने परखा तो पाया कि वह तो नकली है। वह उसे घर पर ही छोड़कर दुकान लौट आया।  
चाचा ने पूछा हार नहीं लाए?
उसने कहा, वह तो नकली था।  
तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार हार लेकर आए थे, तब मैं उसे नकली बता देता तो तुम सोचते कि आज हम पर बुरा वक्‍त आया, तो चाचा हमारी चीज को भी नकली बताने लगे और आज जब तुम्‍हें खुद ज्ञान हो गया, तो पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।  
सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं, वह सब गलत है। और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार होकर रिश्‍ते बिगड़ते हैं।  

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