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साई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैंच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नं. 9098909565

created Friday February 14, 10:39 by lovelesh shrivatri


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मथुरा के पास एक छोटे से गांव में एक किसान परिवार रहता था जो खेती-बाड़ी करके अपना जीवन यापन करता था। उस किसान का एक बेटा था जिसका नाम सोहन था। वह भी खेती बाड़ी में अपने पिताजी का साथ देता था। किसान परिवार हर वर्ष आलू की फसल उगाते थे।
पिताजी पूरा खेत जोतते थे। सोहन की मां और साेहन मिलकर पतली-पतली नालियों की कतार में बीज डालते थे और फिर उसके ऊपर खाद का मिश्रण डालते थे। खाद डालने के बाद उन नालियों को मिट्टी से भर दिया जाता था। लगातार देखभाल और सिंचाई करने के बाद वह बीच बड़े-बड़े आलू बन जाते थे।  
आलू की खेती के दौरान साेहन के पिता ने साेहन को एक ज्ञान की बात बातई- सोहन तुमने देखा कि कैसे यह छोटा सा बीज कितनी जल्‍दी आलू बन जाता है। फिर आलू से हम तरह-तरह के भोजन बनाते है। कुछ इसी तरह से हमारे रिश्‍ते नाते भी पक कर तैयार होते है। हमारा प्रत्‍येक ज्ञान हमारी प्रत्‍येक बात एक बीज की तरह होती है, जो समय के साथ परिपक्त होती जाती है और अलग-अलग परिस्थितियां उन बीजों के लिए खाद की तरह काम करती है।  
इसका मतलब यह है कि आप जीवन में जो भी सिखते हैं उनके बीज आप काफी पहले से ही अपने जीवन में बाेते है। आज के कर्मो के अनुसार ही हमें भविष्‍य में फल मिलता है। हम सब का वर्तमान भी उस खेत की तरह ही है जो एक नई फसल उगाने के लिए तैयार है।  

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