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साँई टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा म0प्र0 सीपीसीटी न्‍यू बैच प्रारंभ संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Mar 25th, 13:17 by sai home


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एक नगर में एक ब्राह्माण रहता था। वह मां भगवती दुर्गा का परम भक्‍त था। उसकी एक कन्‍या थी। ब्राह्माण नियम पूर्वक प्रतिदिन दुर्गा की पूजा और यज्ञ किया करता था। सुमति अर्थात ब्राह्माण की बेटी भी प्रतिदिन इस पूजा में भाग लिया करती थी। एक दिन सुमति खेलने में व्‍यस्‍त के कारण भगवती पूजा में शामिल नहीं हो सकी। यह देख उसके पति को क्रोध गया और क्रोधवश उसके पिता ने कहा कि वह उसका विवाह किसी दरिद्र और कोढी से करेगा।  
पिता की बातें सुनकर बेटी को बड़ा दुख हुआ, और उसने पिता के द्वारा क्रोध में कही गई बातों को सहर्ष स्‍वीकार कर लिया। कई बार प्रयास करने से भी भाग्‍य का लिखा नहीं बदलता है। अपनी बात के अनुसार उसके पिता ने अपनी कन्‍या का विवाह एक कोढ़ी के साथ कर दिया। युमति अपने पति के साथ विवाह कर चली गई। उसके पति का घर होने के कारण उसे वन में घास के आसन पर रात बड़े कष्‍ट  में बितानी पड़ी। गरीब कन्‍या की यह दशा देखकर माता भगवती उसके द्वारा पिछले जन्‍म में की गई उसके पुण्‍य प्रभाव से प्रकट हुई और सुमति से बोली हे कन्‍या मैं तुमपर प्रसन्‍न हूं। मैं तुम्‍हें कुछ देना चाहती हूं, मांगो क्‍या मांगती हो। इस पर सुमति ने उनसे पूछा कि आप मेरी किस बात पर प्रसन्‍न है? कन्‍या की यह बात सुनकर देवी कहने लगी- मैं तुम पर पूर्व जन्‍म के तुम्‍हारे पुण्‍य के प्रभाव से प्रसन्‍न हूं, तुम पूर्व जन्‍म में भील की पतिव्रता स्‍त्री थी।  
एक दिन तुम्‍हारे पति भील द्वारा चोरी करने के कारण दोनों को सिपाहियों ने पकड़ कर जेलखाने में कैद कर  दिया था। उन लोगों ने तुम्‍हें और तुम्‍हारे पति को भोजन भी नहीं दिया था। इस प्रकार नवरात्र के दिनों में तुमने तो कुछ खाया और ही जल पिया इसलिए नौ दिन तक नवरात्र व्रत का फल तुम्‍हें प्राप्‍त हुआ।  
हे ब्राह्माणी, उन दिनों अनजाने में जो व्रत हुआ, उस व्रत के प्रभाव होकर आज मैं तुम्‍हें मनोवांछित वरदान दे रही हूं। कन्‍या बोली कि अगर आप मुझ पर प्रसन्‍न हैं तो कृपा करके मेरे पति को कोढ़ दूर कर दीजिये। माता ने कन्‍या की यह इच्‍छा शीघ्र पूरी कर दी। उसके पति का शरीर माता भगवती की कृपा से रोगहीन हो गया।  
 
 
 
 
 
 
 
 

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