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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤आपकी सफलता हमारा ध्‍येय✤|•༻

created Apr 14th, 04:34 by Deendayal Vishwakarma


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एक जंगल में ढेर सारे जानवर रहा करते थे जंगल के सभी जानवर आपस में मिलजुल कर रहा करते थे। उनमें काफी प्रेम था। सर्दियों का मौसम आया कड़ाके की ठंड ने सभी जानवरों को अपने-अपने घरों में सिकुड़कर रहने के लिए मजबूर कर दिया परंतु जैसे हर रात के बाद सुबह आती है वैसे ही ठंड के बाद बसंत का मौसम आया। बसंत का सुनहरा मौसम जंगल के सभी जानवरों को बहुत भाया। ऐसे सुंदर मौसम का लुफ्त उठाने के लिए सभी जानवर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और एक दूसरे के साथ हंसी ठिठोली करने लगे अपने मजे को दोगुना करने के लिए सभी जानवरों ने कोई खेल खेलने की सोची।
    उनके बीच खेले जा रहे कई खेलों के बीच एक दौड़ प्रतियोगिता का भी आयोजन हुआ। इस दौड़ प्रतियोगिता में जंगल के सभी जानवरों ने भाग लिया। वे सभी काफी जी जान से दौड़े और सफल होने के लिए सारे जानवरों ने अपनी जान लगा दी परंतु कोशिश चाहे जितनी भी कर ली जाए जीत का सेहरा हर किसी के सर नहीं बध सकता क्‍योंकि विजेता तो कोई एक ही होता है। कुछ ही क्षणों में प्रतियोगिता का समापन हो गया और अब बारी थी विजयी प्रतिभागियों को इनाम देने की। जब जंगल के राजा शेर द्वारा दौड़ में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्‍थान पर आए प्रतिभागियों को इनाम दिया जा रहा था तभी नटखट बंदर ने शेर से कहा, शेर राजा आप तो मोटा भाई को भूल ही गए। आखिर वो भी तो इनाम के हकदार हैं। चलो शुरू से ना सही परंतु आखिरी से प्रथम स्‍थान तो उन्‍होंने ही प्राप्‍त किया है ना फिर भला हम उन्‍हें कैसे भूल सकते हैं। शेर ने कहा अरे ये मोटा भाई कौन है पहले तो यह नाम मैंने कभी नहीं सुना बंदर ने कहा अपने अप्‍पू भाई और कौन यह सुनते ही वहां मौजूद सभी जानवर जोर-जोर से ठहाके मारकर हंसने लगे और सामने खड़े हाथी को मोटा भाई, मोटा भाई कहकर चिढ़ाने लगे। वैसे तो हाथी को प्रतियोगिता में सबसे आखरी नंबर पर आने का कोई खेद नहीं था परंतु बंदर द्वारा उसकी हंसी उड़ाए जाने और उसे मोटा भाई कहे जाने पर उसे बहुत गुस्‍सा आया। वह चुपचाप वहां से चला गया परंतु प्रतियोगिता में मिली हार के बाद नटखट बंदर द्वारा हाथी पर लगाया गये मोटा भाई का टैग, अब हटने से रहा। अब तो आए दिन जंगल के सारे जानवर उसे मोटा भाई, मोटा भाई कहकर चिढ़ाते देखते ही देखते हाथी के सब्र का बांध टूट गया और वह जंगल के सभी जानवर पर पागलों की तरह टूट पड़ा। सारे जानवर भयभीत हो कर इधर-उधर भागने लगे परन्‍तु जो भी जानवर क्रोधित हाथी के सामने पड़ा उसने उसे या तो अपने पैरों के नीचे कुचल डाला या फिर उसे जमीन पर पटक-पटक कर मार डाला।

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