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साँई कम्‍प्‍यूटर टायपिंग इंस्‍टीट्यूट गुलाबरा छिन्‍दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565

created Apr 24th, 10:33 by Jyotishrivatri


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मनिकपुर नामक गांव में एक बुढि़या रहती थी। बुढ़ापे की वजह से उसके गाल चिपक गए थे तथा बाल सफेद हो गए थे। मुंह में दांत ना होने के कारण उसकी ठोदि आगे को निकल आई थी। इससे उसकी नाक जो कि पहले से ही लंबी थी और लंबी नजर आने लगी थी। उस बुढि़या की एक पोती थी। उस पोती के मां-बाप बचपन में ही मर गए थे। बुढि़या ने ही उसे पाला-पोसा था। पोती का नाम चंपा था। चंपा बहुत चंचल लड़की थी। अपनी इसी आदत के कारण वह किसी भी काम को ठीक से पूरा नहीं करती थी।   
एक दिन बुढि़या चंपा से बोली- बिटिया में रानी के हाथ-पैर में उबटन मलने राजमहल जा रही हूं, तब तक तू खिचड़ी पका कर तैयार रखना। रानीवास का काम ठहरा। बुढि़या को वहां उबटन मलते, रानी को नहलाते, श्रंगाल करते दोपहर हो गई। वहां से काम निबटाकर वह जल्‍दी-जल्‍दी अपने घर को चल दी। उसे बहुत जोर से भूख लगी हुई थी। वह सोच रही थी कि जल्‍दी घर पर पहुंचु तो खिचड़ी खाऊ। घार आने पर उसने देखा कि चंपा का कहीं पता नहीं है। वह शायद पड़ोस में खेलने चली गई थी। चूल्‍हे पर रखी खिचड़ी जलकर खाक हो गई थी। बुढि़या को चंपा पर बहुत गुस्‍सा आया। वह पड़ोस से कान पकड़कर चंपा को घर लेकर आई और दरवाजा बंद करके उसे दो-चार थप्‍पड़ मार कर बोली- तुझसे तो कोई काम भी नही होता। दिनभर खेलने की ही पड़ी रहती है, लड़की की जात है। दिनभर खेलने की ही पड़ी रहती है। लड़की की जात है, कुछ सीखेगी नहीं तो पराए घर जाकर कैसे निर्वाह होगा। मैं तो तुझ से बहुत दु:खी हो गई हूं, तेरी जैसी लड़की से तो कोई भूत भी बयां नहीं कर सकता।  
बुढि़या के मुंह से यह शब्‍द निकले ही थे कि अचानक किसी ने दरवाजा खटखटाया बुढि़या ने पूछा- कौन है उत्‍तर मिला- मैं भूत हूं। बुढि़या पहले तो डर गई। फिर वह सोचने लगी कि हो सकता है, कोई शैतान लड़का शरारत कर रहा हो और अगर यह वास्‍तव में कोई भूत है तो ऐसा उपाय करना होगा जिससे यह काबू में जाए। इसी कारण वह हिम्‍मत करके बोली- तू यहां किस लिए आया है। भूत बोला- तेरी पोती से ब्‍याह करने।  
उसका जवाब सुनकर बुढि़या घबरा गई वह बहुत चालाक थी कहने लगी- अगर तू भूत है। तो दरवाजे के छेद में से मक्‍खी बनकर अंदर जा। भूत के लिए भला कौन सी मुश्किल बात थी। वह बोला- अच्‍छा अभी आता हूं।  
बुढि़या ने अंदर से छेद में एक बोतल का मुंह लगा दिया और जैसे ही भूत मक्‍खी बनकर बोतल में घुसा तुरंत बोतल में ढक्‍कन लगाकर उसे कसकर बांध‍ दिया। भूत बोतल के अंदरी कैद हो गया। उसने बुढि़या से बाहर निकलने के लिए बहुत खुशामद की। किंतु बुढि़या ने उसकी एक सुनी वह उस बोतल को शहर के बाहर पहाड़ी पर नीम के पेड़ के कोटर में रखकर गई।  

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