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मंगल टाईपिंग (INDIANA)

created Thursday June 23, 03:45 by gg


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बारिश और  बादल दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। जां बादल, वहां वर्षा। हम मई-जून के महीनों की प्रचंड गर्मी के अंत और मानसून के आगमन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, पर आपने कभी सोचा है कि बादल बनते कैंसे हैं? और समुद्री तटों सें हजारों किलोमीटर दूर मैदानी  इलाकों में कैसे पहुंचती है? यह तो आपने सुना और अनुभव भी किया होगा कि जहां पेड़ ज्यादा होते है या घने जंगल होते हैं, वहां बारिश भी ज्यादा होती है।
इन बादलों का बारिश से क्या रिश्ता है? पहाड़ी क्षेत्रों में आपने देखा होगा कि रोज शाम को बारिश होती है। सुबह जमीन पर और पेड़ों पर बादल से रहते हैं और जैसे-जैसे धूप चढ़ाती है, बादल भी पेड़ों के ऊपर चढ़ना शुरु कर देते हैं। शाम के चार-पांच बजते ही वे बरसना शुरू कर देते है। बादल जहां बरसते हैं, वहां तो समुद्र है और ही मानसूनी बादल। फिर यह रोज-रोज बारिश कैसी? और क्यों? इन प्रश्नों के उत्तर हमें पीटर वोल्हलेबेन की किताब हिडन लाइफ ऑफ ट्रीज में मिलते हैं। जंगल में पानी कैसे पहुंचता है या एक कदम पीछे चलें, तो पानी जमीन पर कैसे पहुंचता है? यह सवाल लगता तो एकदम सरल है, लेकिन इसका उत्तर उतना ही कठिन है। जीवन का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण यह  है कि यह जल से ऊंची होती है। गुरुत्व के कारण पानी सबसे निचले स्तर की ओर बहता चला जाता है। इसके कारण कालांतर में सारे महाद्वीप सूख सकते हैं, परंतु ऐसा होता नहीं है। इसके लिए बादलों द्वारा लगातार बरसाए जाने वाले पानी का हमें धन्यवाद करना चाहिए। जो बादल वाष्पीकरण के कारण समुद्र के ऊपर बनते और  हवा द्वारा जमीन की ओर बड़ा दिए जाते हैं, समुद्री तटों से कुछ किलोमीटर अंदर तक ही कार्यशील  रहते हैं। जंगल के अंदर की ओर सूखा होता है, क्योंकि बादलों से पानी बरस चुका है और अब बादल गायब हो चुके होते है।
 
उपरोक्त गद्यांश मे गलती हुई हो तो मुझे क्षमा कीजिए।
 

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