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BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤ आपकी सफलता हमारा ध्‍येय ✤|•༻

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ग्रामीण पर्यटन समावेशी विकास का एक अच्‍छा जरिया है क्‍योंकि यह केवल राष्‍ट्रीय आय में महत्‍वपूर्ण योगदान देता है, बल्कि सामुदायिक विकास को भी बढ़ावा देता है। यह संस्‍कृति, विरासत, रीति-रिवाजों, भोजन और जैव विविधता के संरक्षण जैसे सकारात्‍मक प्रभाव उत्‍पन्‍न करता है। भारत में पर्यटन की एक और महत्‍वपूर्ण एवं लगातार उभरती शाखा चिकित्‍सा पर्यटन है। नि:संदेह ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता है। ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और उन्‍हें सुगम्‍य बनाने के लिए एकीकृत दृष्टिकोण से इस क्षमता का सफलतापूर्वक दोहन किया जा सकता है और विकसित भारत के निर्माण में इनके योगदान को बढ़ाया जा सकता है। पर्यटन आर्थिक विकास का एक महत्‍वपूर्ण प्रेरक रहा है। प्राचीनकाल से ही आकर्षणों से सराबोर भारत की ओर पर्यटकों का आगमन अच्‍छा रहा है। हाल के वर्षों में भी भारत पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है।
    ग्रामीण पर्यटन समावेशी विकास का सर्वोत्‍तम उदाहरण है क्‍योंकि यह केवल राष्‍ट्रीय आय में बल्कि सामुदायिक विकास में भी महत्‍वपूर्ण योगदान देता है। यह स्‍थानीय उद्योगों को प्रोत्‍साहित करके रोजगार के अवसर बढ़ाता है और स्‍थानीय विशिष्‍ट विक्रय बिंदुओं का लाभ उठाता है। ग्रामीण इलाकों की प्राकृतिक सुंदरता, संस्‍कृति और सादगी को उजागर करके यह युवाओं और महिलाओं को सशक्‍त बनाता है। इसके सकारात्‍मक प्रभावों में संस्‍कृति, विरासत, परंपरा, स्‍थानीय और जैव-विविधता का संरक्षण शामिल है। किसी भी क्षेत्र में पर्यटन का विकास केवल उस क्षेत्र की विशिष्‍ट और आकर्षक विशेषताओं को प्रदर्शित करता है बल्कि उन विशेषताओं को बढ़ाने वाले सभी संबंधों को भी मजबूत करता है। इसका एक हालिया उदाहरण प्रयागराज में आयोजित कुंभ मेला है जिसमें करोडों लोग आए। इस आयोजन के लिए केवल परिवहन और आवास संबंधित आधारभूत संरचना की व्‍यवस्‍था की गई बल्कि बहुस्‍तरीय सुरक्षा एवं निगरानी प्रणाली, भीड़-प्रबंधन तंत्र, वरिष्‍ठ नागरिकों और दिव्‍यांग नागरिकों के लिए सुविधाओं की व्‍यवस्‍था भी कुशलतापूर्वक की गई।

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