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TRIVENI TYPING MANSAROVAR COMPLEX CHHINDWARA MOB-7089973746
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उनका एक बयान आज भी कई लोगों के जेहन में होगा- दिल्ली सोएगी और मैं जागूंगी। इसी तरह, शीला दीक्षित ने यहां के बुनियादी ढांचे पर काफी काम किया और दिल्ली का कायांतरण कर दिया। आतिशी को भी कम समय मिला, लेकिन वह जिम्मेदारी के प्रति गंभीर दिखीं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जो सुधार हुआ है, उसमें आतिशी का बड़ा योगदान माना जाता है। चूंकि इन सभी महिला मुख्यमंत्रियों ने कुशलता से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और लोगों पर अपनी छाप छोड़ी है, इसलिए नई मुख्यमंत्री के सामने एक सफल महिला मुख्यमंत्री होने की बड़ी चुनौती है। कुछ लोग कहते हैं, आतिशी के जवाब में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री पद दिया गया है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। उनकी ताजपोशी तीन पहलुओं की ओर इशारा करती है। पहला, बतौर नेतृत्व महिलाओं की अहमियत संघ और भाजपा अब समझने लगी है। दूसरा, रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर अरविंद केजरीवाल के बनिया वोट-बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की गई है। और तीसरा, जान पड़ता है कि भाजपा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी दूर हो गई है और महाराष्ट्र, हरियाणा के बाद अब दिल्ली में भी मुख्यमंत्री-चयन में उसी की चली है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने यह समझ लिया है कि संघ के नाराज रहने से लोकसभा चुनाव में उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए संघ के बड़े पदाधिकारियों को सफलतापूर्वक मना लिया गया है। इसलिए रेखा गुप्ता को संघ ने जिस उम्मीद से आगे किया है, उस पर भी उनको खरा उतरना होगा। इन सबके बीच नई मुख्यमंत्री के सामने फ्रीबीज , यानी मुफ्त की योजनाओं से पार पाने की भी चुनौती होगी। आम आदमी पार्टी की रणनीति का उनका एक बयान आज भी कई लोगों के जेहन में होगा- दिल्ली सोएगी और मैं जागूंगी। इसी तरह, शीला दीक्षित ने यहां के बुनियादी ढांचे पर काफी काम किया और दिल्ली का कायांतरण कर दिया। आतिशी को भी कम समय मिला, लेकिन वह जिम्मेदारी के प्रति गंभीर दिखीं। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में जो सुधार हुआ है, उसमें आतिशी का बड़ा योगदान माना जाता है। चूंकि इन सभी महिला मुख्यमंत्रियों ने कुशलता से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया है और लोगों पर अपनी छाप छोड़ी है, इसलिए नई मुख्यमंत्री के सामने एक सफल महिला मुख्यमंत्री होने की बड़ी चुनौती है। कुछ लोग कहते हैं, आतिशी के जवाब में रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री पद दिया गया है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। उनकी ताजपोशी तीन पहलुओं की ओर इशारा करती है। पहला, बतौर नेतृत्व महिलाओं की अहमियत संघ और भाजपा अब समझने लगी है। दूसरा, रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री बनाकर अरविंद केजरीवाल के बनिया वोट-बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की गई है। और तीसरा, जान पड़ता है कि भाजपा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नाराजगी दूर हो गई है और महाराष्ट्र, हरियाणा के बाद अब दिल्ली में भी मुख्यमंत्री-चयन में उसी की चली है। भाजपा के शीर्ष नेताओं ने यह समझ लिया है कि संघ के नाराज रहने से लोकसभा चुनाव में उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था, इसलिए संघ के बड़े पदाधिकारियों को सफलतापूर्वक मना लिया गया है। इसलिए रेखा गुप्ता को संघ ने जिस उम्मीद से आगे किया है, उस पर भी उनको खरा उतरना होगा। इन सबके बीच नई मुख्यमंत्री के सामने फ्रीबीज , यानी मुफ्त की योजनाओं से पार पाने की भी चुनौती होगी। आम आदमी पार्टी की रणनीति का
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