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हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते, जिसे इंडिया-ईयू एफटीए कहा जाता है, को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सकारात्मक संकेत मिले हैं। जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इस समझौते को शीघ्र पूरा करने के लिए अपना स्पष्ट समर्थन व्यक्त किया है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि जर्मनी भारत और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से लंबित एफटीए को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने के पक्ष में है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कई वर्षों से चल रही है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाना है। यदि यह समझौता लागू होता है, तो इससे भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में बेहतर पहुंच मिलेगी और यूरोपीय कंपनियों को भारत में व्यापार और निवेश के नए अवसर प्राप्त होंगे।
जर्मनी, यूरोपीय संघ का एक प्रमुख और प्रभावशाली देश है। भारत के साथ जर्मनी के व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत रहे हैं। जर्मनी भारत का यूरोप में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार माना जाता है। ऐसे में जर्मन चांसलर का यह समर्थन भारत-ईयू एफटीए के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि चांसलर मर्ज़ ने भारत यात्रा के दौरान इस समझौते को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।
इस समझौते से भारत के विभिन्न क्षेत्रों को लाभ होने की उम्मीद है। विशेष रूप से कृषि उत्पाद, वस्त्र उद्योग, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी और सेवा क्षेत्र को बड़ा फायदा मिल सकता है। भारतीय निर्यातकों के लिए यूरोपीय बाजार में शुल्क में कमी और नियमों में सरलता से प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा। वहीं, यूरोपीय संघ को भी भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में, जब कई देश संरक्षणवादी नीतियां अपना रहे हैं, भारत और यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इससे आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने, निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने में मदद मिल सकती है। जर्मनी का मानना है कि यह समझौता यूरोप और भारत दोनों की आर्थिक स्थिरता को मजबूत करेगा।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में यूरोपीय आयोग और यूरोपीय परिषद के शीर्ष नेता भारत की यात्रा कर सकते हैं। इन यात्राओं का उद्देश्य एफटीए वार्ता को आगे बढ़ाना और शेष मुद्दों को सुलझाना होगा। भारत सरकार भी इस समझौते को संतुलित और पारस्परिक लाभकारी बनाने पर जोर दे रही है, ताकि घरेलू उद्योगों के हित सुरक्षित रह सकें।
कुल मिलाकर, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ का समर्थन भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। यदि यह समझौता जल्द पूरा होता है, तो यह भारत और यूरोप के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इससे केवल व्यापार बढ़ेगा, बल्कि तकनीक, निवेश और रोजगार के क्षेत्रों में भी व्यापक सहयोग देखने को मिलेगा। भारत के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, जो उसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था में और अधिक मजबूत स्थान दिला सकता है।

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