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TRIVENI TYPING MANSAROVAR COMPLEX CHHINDWARA MOB-7089973746
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बहुत सारे लोग आज भी यह मानने को तैयार नहीं कि सोशल मीडिया एक गंभीर माध्यम है। हालांकि, यह न सिर्फ सूचनाओं के त्वरित प्रसार का सबसे सशक्त माध्यम बन गया है, बल्कि ओपिनियन मेकर यानी जनमत-निर्माण में भी बेहद प्रभावी भूमिका निभाने लगा है। पश्चिम के राजनेताओं ने इसकी इस ताकत को डेढ़ दशक पहले ही भांप लिया था और अब तो अपने देश में भी सबको सोशल मीडिया टीम बनानी पड़ रही है। फिर भी, इसकी बदलावकारी भूमिका को स्वीकार करने को लोग तैयार नहीं। मगर वर्षा सोलंकी की कामयाबी बताती है कि मन में लगन हो, तो सोशल मीडिया के सहारे भी मंजिल पाई जा सकती है। आज से करीब 40 साल पहले मुंबई के एक गरीब परिवार में वर्षा पैदा हुईं। होश संभाला, तो आस-पास की विसंगतियों को देखकर समझ में नहीं आता था कि आखिर ऐसा क्यों है? उनकी उम्र के दूसरे बच्चों के पास जो कुछ है, वह उन्हें क्यों नहीं हासिल है? महानगरों के गरीब बच्चों की पीड़ा पिछड़े इलाकों के मासूमों से अधिक गहरी होती है। दरअसल, उनकी आंखों के सामने पसरी समृद्धि हजारों ख्वाहिशें पैदा करती हैं। अब वे क्या जानें कि माता-पिता के पास उन्हें पूरा करने की आर्थिक हैसियत भी होनी चाहिए! वर्षा को बचपन से ही डांस सीखने का बहुत शौक था। मगर यहां तो किसी तरह गुजारे की नौबत थी। पिता को शराब पीने की बहुत बुरी लत लग गई थी। वह जो कुछ भी कमाते, उसका ज्यादातर मयखानों की नजर करके घर लौटते और जब कभी पत्नी टोकती, तो उन पर हाथ उठा बैठते। वर्षा अपनी छोटी बहन के साथ जार-जार रोतीं। घर में ज्यादा क्लेश न हो और अपनी दोनों बेटियों को भर पेट भोजन करा सकें, इसके लिए वर्षा की मां ने दूसरों के घर में बर्तन मांजने का काम शुरू कर दिया।
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