Text Practice Mode
BUDDHA ACADEMY TIKAMGARH (MP) || ☺ || ༺•|✤ MP_ASI_HINDI_TYPING ✤|•༻
created Today, 03:01 by typing test
0
601 words
57 completed
0
Rating visible after 3 or more votes
saving score / loading statistics ...
00:00
अपीलार्थी की ओर से अपील में यह व्यक्त किया गया है कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा पारित निर्णय एवं दण्डाज्ञा विधि विधान के प्रचलित नियमों के विपरीत होने से निरस्ती योग्य है। अधीनस्थ न्यायालय ने अभियोजन साक्ष्य पर गंभीरतापूर्वक विचार न करते हुये एकमात्र फरियादी के साक्ष्य के आधार पर अपीलार्थी को भारतीय दण्ड संहिता के अपराध में दोषी मानकर भारी भूल की है। यदि अभियुक्त किसी अपराध के लिए पहले दोषसिद्ध किए जाने पर किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए ऐसी पूर्व दोषसिद्धि के कारण वर्धित दंड का या भिन्न प्रकार के दंड का भागी है और यह आशयित है कि ऐसी पूर्व दोषसिद्धि उस दंड को प्रभावित करने के प्रयोजन के लिए साबित की जाए जिसे न्यायालय पश्चात्वर्ती अपराध के लिए देना ठीक समझे तो पूर्व दोषसिद्धि का तथ्य, तारीख और स्थान आरोप में कथित होंगे और यदि ऐसा कथन रह गया है तो न्यायालय दंडादेश देने के पूर्व किसी समय भी उसे जोड़ सकेगा। यदि परिवर्तित या परिवर्धित आरोप में कथित अपराध ऐसा है, जिसके अभियोजन के लिए पूर्व मंजूरी की आवश्यकता है, तो उस मामले में मंजूरी अभिप्राप्त किए बिना कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी जब तक कि उन्हीं तथ्यों के आधार पर जिन पर परिवर्तित या परिवर्धित आरोप आधारित हैं, अभियोजन के लिए मंजूरी पहले ही अभिप्राप्त नहीं कर ली गई है। किसी ऐसे साक्षी को जिसकी परीक्षा ली जा चुकी है, पुन: बुलाने की या पुन: समन करने की और उसकी ऐसे परिवर्तन या परिवर्धन के बारे में परीक्षा करने की अनुज्ञा दी जाएगी जब तक न्यायालय का ऐसे कारणों से जो लेखबद्ध किए जाएंगे यह विचार नहीं है कि यथास्थिति, अभियोजक या अभियुक्त तंग करने के या विलंब करने के या न्याय के उद्देश्यों को विफल करने के प्रयोजन से ऐसे साक्षी को पुन: बुलाना या उसकी पुन: परीक्षा करना चाहता है।
प्रकरण में यह उल्लेखनीय तथ्य है कि अपीलार्थी/आरोपी क्रमांक 2 'ख' की दिनांक 15/11/2018 को मृत्यु हो जाने से न्यायालय द्वारा उसके विरूद्ध दिनांक 14/03/2020 को प्रकरण में कार्यवाही समाप्त की गई है। अत: यह निर्णय केवल अपीलार्थी/आरोपी क्रमांक 1 'क' के संबंध में पारित किया जा रहा है। (बुद्ध अकादमी टीकमगढ़) अपीलार्थीगण/अभियुक्तगण द्वारा प्रस्तुत अपील को उद्भूत करने वाले दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 7673/2011 के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार से है कि परिवादी 'ग' का विवाह अभियुक्त 'क' के साथ 1994 में हिन्दूरीति रिवाज से हुआ था। उक्त विवाह में उसके पिता द्वारा हैसियत अनुसार नगद व गृहस्थी का सामान दिया था। शादी में स्कूटर, वाशिंग मशीन, टी.व्ही., नगद 40 हजार रूपए न मिलने पर अभियुक्तगण द्वारा उसके साथ उक्त सामान लाने की बात कहकर मारपीट की जाने लगी तथा उसे मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा तथा दहेज में उक्त सामान की मांग करने लगे। उसका पति 'क' अक्सर उसके कमरे में बैठकर शराब पीता व मारपीट करता था। दिनांक 12 व 15 नवम्बर 1995 को अभियुक्तगण ने उसे कमरे में बंद कर उससे उसकी मां के लिए दहेज की मांग को लेकर पत्र लिखने को मजबूर किया गया, जिसे 'घ' उसकी मां को देने गया था। बाद में दिनांक 08.06.1995 को अभियुक्तगण ने उसे घर से निकाल दिया तथा 'घ' के साथ मायके भेज दिया। वह दिनांक 08.06.1995 से दिनांक 24.12.1997 तक मायके में रही। उसके बाद अभियुक्तगण के परेशान न करने के आश्वासन पर वापस दिनांक 12 जुलाई को ससुराल आ गई, उसके बाद भी अभियुक्तगण ने उसे परेशान किया व जान से मारने की कोशिश की। तब परिवादी द्वारा महिला थाना जबलपुर में अभियुक्तगण के विरूद्ध लिखित रिपोर्ट की गई। जिस पर महिला थाना, जबलपुर में अपराध क्रमांक-1/1998 अंतर्गत धारा 498ए, 33 भा.दं.सं. एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिशेध अधिनियम पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
प्रकरण में यह उल्लेखनीय तथ्य है कि अपीलार्थी/आरोपी क्रमांक 2 'ख' की दिनांक 15/11/2018 को मृत्यु हो जाने से न्यायालय द्वारा उसके विरूद्ध दिनांक 14/03/2020 को प्रकरण में कार्यवाही समाप्त की गई है। अत: यह निर्णय केवल अपीलार्थी/आरोपी क्रमांक 1 'क' के संबंध में पारित किया जा रहा है। (बुद्ध अकादमी टीकमगढ़) अपीलार्थीगण/अभियुक्तगण द्वारा प्रस्तुत अपील को उद्भूत करने वाले दाण्डिक प्रकरण क्रमांक 7673/2011 के तथ्य संक्षेप में इस प्रकार से है कि परिवादी 'ग' का विवाह अभियुक्त 'क' के साथ 1994 में हिन्दूरीति रिवाज से हुआ था। उक्त विवाह में उसके पिता द्वारा हैसियत अनुसार नगद व गृहस्थी का सामान दिया था। शादी में स्कूटर, वाशिंग मशीन, टी.व्ही., नगद 40 हजार रूपए न मिलने पर अभियुक्तगण द्वारा उसके साथ उक्त सामान लाने की बात कहकर मारपीट की जाने लगी तथा उसे मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा तथा दहेज में उक्त सामान की मांग करने लगे। उसका पति 'क' अक्सर उसके कमरे में बैठकर शराब पीता व मारपीट करता था। दिनांक 12 व 15 नवम्बर 1995 को अभियुक्तगण ने उसे कमरे में बंद कर उससे उसकी मां के लिए दहेज की मांग को लेकर पत्र लिखने को मजबूर किया गया, जिसे 'घ' उसकी मां को देने गया था। बाद में दिनांक 08.06.1995 को अभियुक्तगण ने उसे घर से निकाल दिया तथा 'घ' के साथ मायके भेज दिया। वह दिनांक 08.06.1995 से दिनांक 24.12.1997 तक मायके में रही। उसके बाद अभियुक्तगण के परेशान न करने के आश्वासन पर वापस दिनांक 12 जुलाई को ससुराल आ गई, उसके बाद भी अभियुक्तगण ने उसे परेशान किया व जान से मारने की कोशिश की। तब परिवादी द्वारा महिला थाना जबलपुर में अभियुक्तगण के विरूद्ध लिखित रिपोर्ट की गई। जिस पर महिला थाना, जबलपुर में अपराध क्रमांक-1/1998 अंतर्गत धारा 498ए, 33 भा.दं.सं. एवं धारा 3/4 दहेज प्रतिशेध अधिनियम पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
saving score / loading statistics ...