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जीवन में भगवान सबको समान अवसर देते हैं। कुछ लोग इन अवसरों की गंभीरता को समझते हुए इन अवसरों का लाभ उठाते हैं। पर कुछ लोग ऐसे भी होते है जो हमेशा भगवान के भरोसे होते है और इंतजार करते रह जाते हैं। एक बार की बात है एक नदी के पास ही एक शहर था जहां पर सभी लोग सुख से जीवन बिता रहे थे एक दिन भयंकर बरसात हुई जिसकी वजह से नदी का पानी अचानक से ऊपर आने लगा। देखते ही देखते शहर में जल सैलाव गया और सभी लोग अपनी जान बचाने के लिए शहर से दुर जाने लगे। एक तरफ जहां यह सब हो रहा था वहीं दूसरी तरफ एक इंसान था जिसे भगवान पर भरोसा था कि उसे कुछ नहीं होगा। इसलिए वह शहर से दुर ना जाने की वजाए पास के ही एक मंदिर में चला गया। भयंकर बारिश और नदी में सैलाव के कारण पानी खतरे के निशान से ऊपर जा रहा था। भागमभाग में लोगों की नजर मंदिर में बैठे उस आदमी पर गयी। तो सबने उसको साथ चलने के लिए कहा।
     लेकिन उस इंसान ने साथ जाने से इंकार कर दिया और कहा कि वह भगवान की शरण में हैं और उसे कुछ नहीं होगा। ऐसा सुन वे लोग वहां से चले गए। कुछ समय बाद नाव के सहारे लोग उस आद‌मी को बचाने आया जब उस आद‌मी को साथ चलने को कहा गया तो उसने इस बार भी जाने से मना कर दिया। उसने कहा कि वह औरों की तरह नहीं है जो भगवान में भरोसा ना रखों भगवान उसे खुद बचाने जाएँगे। जैसे जैसे नदी का पानी उफान मार रहा था और सब कुछ तहस नहस कर रहा था वैसे वैसें उस आद‌मी का डर भी उजागर हो रहा था। उसे लगने लगा कि वह सुरक्षित नहीं रह पायेगा। इसलिए अपनी जान बचाने के लिए वह मंदिर के टिले पर चला गया। पर अब भी सैलाब थम नहीं रहा था। उसने भगवान को खुब याद किया। पर भगवान सामने नहीं आये।
       फिर कुछ लोग वायुयान से सैलाब में फंसे उस आद‌मी की मदद करने आये इस समय वह आद‌मी चाहता तो वायुयान में जाकर अपनी जान बचा सकता था लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। बहुत समझाने के बाद भी वह आद‌मी वायुयान में नहीं गया। अंत में वायुयान भी वहा से चला गया। समय बितता गया और हालात और भी अधिक खराब होने लगे। यह सब देखकर वह रोने लगा और भगवान से शिकायत करने लगा कि वे उसको बचाने नहीं आये तब भगवान ने उसे मन में कहा कि वे तो तीन बार उसे बचाने आए पर उसने ही सभी अवसर खो दिए। उसे अपनी गलती का एहसास हुआ और वह मन ही मन बहुत पछताया।

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