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साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा (म0प्र0) सीपीसीटी न्यू बैच प्रारंभ संचालक- लकी श्रीवात्री मो. नं. 9098909565
created Today, 07:25 by lovelesh shrivatri
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भारत का गणतंत्र दिवस सिर्फ यह याद करने भर का अवसर नहीं है कि इस दिन हमारे देश का संविधान लागू हुआ था। यह इस बात का भी अहसास दिलाता है कि संविधान लागू होने के बाद देश के गणतंत्र को कितनी मजबूती मिली है। पिछले वर्षो में सफलता के कितने पायदान चढ़े, इसको ध्यान में रखने और आगे के पायदनों पर क्या कुछ करना है इसमें संकल्पित होकर जुटने का भी यह गौरव दिवस है। आजादी के तत्काल बाद ही हमारे नीति नियंताओं ने इस बात को गहराई से समझ लिया था कि देश का अपना संविधान जरूरी है, जहां शासन जनता का, जनता के लिए व जनता के द्वार हो।
इसमें दोराय नहीं कि देश का संविधान हमारे लोकतंत्र के लिए दिशा दिर्नेश तय करता रहा है। यह संविधान ही है जो लोकतंत्र में विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका को अधिकार सम्पन्न बनाता है। यही संविधान देश के प्रत्येक मतदाता को वोट की वह ताकत देता है, जिसकी कीमत अनमोल है। जाहिर है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में शासन के कल्याणकारी होने की अपेक्षा के साथ जनता से भी यह उम्मीद की जाती है कि वह अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की पालना में भी सजग रहे। सबसे अहम बात यह भी है कि गणतंत्र ने इस देश के प्रत्येक नागरिक को न केवल अपनी बात कहने की ताकत दी है, बल्कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार भी दिया है। हमें सदैव इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि लोकतांत्रिक देश में असली ताकत मतदाता के हाथ में ही होता है। संयोग यह भी है कि गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले हमारे यहां राष्ट्रीय मतदाता दिवस भी मनाया जाता है। यह दिवस भी गणतंत्र दिवस भी गणतंत्र को मजबूती देने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें देश के प्रत्येक मतदाता से यह अपक्षा की जाती हैं कि जनप्रतिनिधियों के चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया है कि देश में मतदाता बनने का उत्सव मनाया जाए। मतदान से विमुख होने वालों को बाद में अपने जनप्रतिनिधियों को कौसने का अधिकार कतई नहीं होना चाहिए। इसलिए बड़ी जिम्मेदारी युवा मतदाताओं की बनती हैं कि पंचायत से लेकर लोकसभा तक के लिए अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका आए तो वोट अवश्य दें। यह इसलिए भी कि कोई भी वोट सिर्फ अंकों की गिनती मात्र नहीं बल्कि गांव, शहर प्रदेश व देश की दिशा तक करने वाला होता है।
इसमें दोराय नहीं कि देश का संविधान हमारे लोकतंत्र के लिए दिशा दिर्नेश तय करता रहा है। यह संविधान ही है जो लोकतंत्र में विधायिका कार्यपालिका और न्यायपालिका को अधिकार सम्पन्न बनाता है। यही संविधान देश के प्रत्येक मतदाता को वोट की वह ताकत देता है, जिसकी कीमत अनमोल है। जाहिर है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में शासन के कल्याणकारी होने की अपेक्षा के साथ जनता से भी यह उम्मीद की जाती है कि वह अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों की पालना में भी सजग रहे। सबसे अहम बात यह भी है कि गणतंत्र ने इस देश के प्रत्येक नागरिक को न केवल अपनी बात कहने की ताकत दी है, बल्कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने का अधिकार भी दिया है। हमें सदैव इस बात को भी ध्यान में रखना होगा कि लोकतांत्रिक देश में असली ताकत मतदाता के हाथ में ही होता है। संयोग यह भी है कि गणतंत्र दिवस के एक दिन पहले हमारे यहां राष्ट्रीय मतदाता दिवस भी मनाया जाता है। यह दिवस भी गणतंत्र दिवस भी गणतंत्र को मजबूती देने के प्रयासों से जुड़ा है, जिसमें देश के प्रत्येक मतदाता से यह अपक्षा की जाती हैं कि जनप्रतिनिधियों के चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी रविवार को मन की बात कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया है कि देश में मतदाता बनने का उत्सव मनाया जाए। मतदान से विमुख होने वालों को बाद में अपने जनप्रतिनिधियों को कौसने का अधिकार कतई नहीं होना चाहिए। इसलिए बड़ी जिम्मेदारी युवा मतदाताओं की बनती हैं कि पंचायत से लेकर लोकसभा तक के लिए अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका आए तो वोट अवश्य दें। यह इसलिए भी कि कोई भी वोट सिर्फ अंकों की गिनती मात्र नहीं बल्कि गांव, शहर प्रदेश व देश की दिशा तक करने वाला होता है।
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