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साँई कम्प्यूटर टायपिंग इंस्टीट्यूट गुलाबरा छिन्दवाड़ा (म0प्र0) संचालक:- लकी श्रीवात्री मो0नां. 9098909565
created Today, 06:45 by lucky shrivatri
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विमान हादसों की कोई एक वजह नहीं होती। कभी ये हादसे तकनीकी खामियों के कारण होते हैं तो कई बार मौसम का अनुकूल नहीं होना भी वजह बनता है। बुधवार की सुबह लैडिग के दौरान क्रैश हुए चार्टर प्लेन में सवार महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अंजित पवार समेत चार अन्य लोगों की मृत्यु ऐसे हादसों में एक कड़ी और जोड़ गई है। इस दुर्घटना के कारण क्या रहे, इसकी जांच होना अभी शेष है। हर हादसे के बाद जांच का ऐलान होता है, जांच होती भी है और रिपोर्ट भी सामने आती है, लेकिन चिंताजनक तथ्य यही है कि इसके बावजूद विमान हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं लेता।
तकनीक के इस्तेमाल में हम लगातार आगे बढ़ रहे है। तकनीक के जरिये ही धरती से विमानों पर पल-पल नजर रखना भी आसान हुआ है। इसके बावजूद पिछले वर्षो में ऐसे कई छोटे-बड़े विमान क्रैश हुए है, जिनमें कई जाने भी जा चुकी है। यह भी तथ्य हैं कि अत्यंत जटिल मशीन प्रणाली वाले विमानों में मामूली त्रुटि भी बड़े हादसों की वजह बन जाती है। इन त्रुटियों का समय पर पकड़ में न आना या जानकारी होने के बावजूद लापरवाही बरतना जानलेवा साबित हो जाता है। सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन हो तो ऐसे हादसों की रोकथाम की जा सकती है।
बेहतर रखरखाव, कुशल हाथों से परिचालन और तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ नियमन में सख्ती इसके लिए जरूरी है। इस हादसे के बाद यह जानकारी भी सामने आ रही हैं कि इस मॉडल के विमान में अजित पवार सवार थे, उस मॉडल के विमानों से अब तक दो सौ से ज्यादा हादसे हो चुके है। वर्ष 2021 में ही कंपनी इस विमान का निर्माण बंद कर चुकी है, लेकिन पुराने मॉडल अब भी काम आ रहे है। इस विमान के हादसे की वजह क्या तकनीकी खामी रही होगी, यह तथ्य तो जांच के बाद ही सामने आएगा। हालांकि प्रत्येक उड़ान से पहले व बाद में तकनीकी जांच अनिवार्यता के प्रोटोकॉल की पालना में ढिलाई भी हादसों की वजह बनती रही है। विमान के इंजन नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा यंत्रों की समय-समय पर जांच तो जरूरी है ही, विमान पायलटों को तकनीकी रूप से दक्ष करने के साथ आपत स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
तकनीक के इस्तेमाल में हम लगातार आगे बढ़ रहे है। तकनीक के जरिये ही धरती से विमानों पर पल-पल नजर रखना भी आसान हुआ है। इसके बावजूद पिछले वर्षो में ऐसे कई छोटे-बड़े विमान क्रैश हुए है, जिनमें कई जाने भी जा चुकी है। यह भी तथ्य हैं कि अत्यंत जटिल मशीन प्रणाली वाले विमानों में मामूली त्रुटि भी बड़े हादसों की वजह बन जाती है। इन त्रुटियों का समय पर पकड़ में न आना या जानकारी होने के बावजूद लापरवाही बरतना जानलेवा साबित हो जाता है। सुरक्षा मानकों का कठोरता से पालन हो तो ऐसे हादसों की रोकथाम की जा सकती है।
बेहतर रखरखाव, कुशल हाथों से परिचालन और तकनीकी उन्नयन के साथ-साथ नियमन में सख्ती इसके लिए जरूरी है। इस हादसे के बाद यह जानकारी भी सामने आ रही हैं कि इस मॉडल के विमान में अजित पवार सवार थे, उस मॉडल के विमानों से अब तक दो सौ से ज्यादा हादसे हो चुके है। वर्ष 2021 में ही कंपनी इस विमान का निर्माण बंद कर चुकी है, लेकिन पुराने मॉडल अब भी काम आ रहे है। इस विमान के हादसे की वजह क्या तकनीकी खामी रही होगी, यह तथ्य तो जांच के बाद ही सामने आएगा। हालांकि प्रत्येक उड़ान से पहले व बाद में तकनीकी जांच अनिवार्यता के प्रोटोकॉल की पालना में ढिलाई भी हादसों की वजह बनती रही है। विमान के इंजन नेविगेशन उपकरण और सुरक्षा यंत्रों की समय-समय पर जांच तो जरूरी है ही, विमान पायलटों को तकनीकी रूप से दक्ष करने के साथ आपत स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण भी दिया जाना चाहिए।
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