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TRIVENI TYPING MANSAROVAR COMPLEX CHHINDWARA MOB-7089973746

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मगर वह ऐसी योजनाओं पर हमलावर भी रही है। हालांकि, अभी एमसीडी का चुनाव सामने है, तो लगता यही है कि इनमें अभी शायद ही कोई छेड़छाड़ की जाएगी। हां, एमसीडी चुनाव के बाद ऐसी योजनाओं को तार्किक बनाने की मांग जरूर पार्टी के भीतर से उठ सकती है। भारत के ड्रोन उद्योग की नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा हालिया आलोचना भारत की तकनीकी क्षमताओं के बारे में उनकी गलतफहमी और चीन द्वारा पैदा खतरों के प्रति उपेक्षा भाव को उजागर करती है। भारतीय उद्योग को निशाना बनाते हुए उन्होंने एक तरह से चीनी ड्रोन कंपनी डीजीआई का प्रचार भी कर दिया। वास्तव में, आज भारत के बढ़ते ड्रोन और रोबोटिक्स क्षेत्रों पर सवाल उठाने की नहीं, समर्थन करने की जरूरत है। रोबोटिक्स, ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों में चीन का वर्चस्व वाकई प्रभावी लगता है, पर वह सरकारी नियंत्रण, जासूसी और शोषण की नींव पर खड़ा है। यूनिट्री और डीजेआई जैसी चीनी कंपनियां केवल इस उद्योग की अग्रणी नहीं हैं; वे विश्व पर नजर रखने के लिए अपनी सरकार की वर्चस्ववादी शक्ति का विस्तार भी हैं। सरकारी सब्सिडी और बौद्धिक संपदा की चोरी ने चीनी कंपनियों की सफलता को कृत्रिम रूप से बढ़ा दिया है, मगर यह दिखावा अब खत्म हो रहा है। अब अमेरिका, यूरोप कदम उठा रहे हैं, अपने उद्योगों की रक्षा के लिए प्रतिबंध लगा रहे हैं, टैरिफ लागू कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में चीन का स्वर्ण युग खत्म हो रहा है। इससे भारत के लिए अवसर पैदा हो रहा है। देश एक ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है। भारत की दृष्टि मौलिक रूप से अलग है। भारत गुप्त रणनीति या जासूसी पर नहीं, बल्कि अपनी प्रतिभा, नवाचार और ईमानदारी पर भरोसा करता है। आईटी सेवाओं और दवा क्षेत्र में भारत की कामयाबी इसकी क्षमता और विश्वसनीयता का प्रमाण है। भारत के रोबोटिक्स

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